मानवीयता के अभाव में कोई भी वाद चल नहीं सकता

बैंगलोर आश्रम, भारत


१८ नवंबर, २००९ को परम पूज्य श्री श्री रवि शंकर ने बैंगलोर आश्रम में पधारे जर्मनी के मंत्री-राष्ट्रपति श्री गुन्थर ह. ओएट्टिंगर एवं उनके साथ पधारे राजनैतिक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। इस प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी के वित्त एवं अर्थशास्त्र के राज्य मंत्री एवं अन्य संसद सदस्य शामिल थे। इस उपल्क्ष्य में कर्नाटक प्रदेश के उद्योग मंत्री श्री मुरुगेश रुद्रप्पा निरानी एवं फ़ेडरेशन आफ़ करनाटक चेंबर आफ़ कौमर्स एण्ड इन्डस्ट्री के अध्यक्ष श्री क्रास्टा भी मौजूद थे।
श्री श्री ने कहा:
आप सब का स्वागत है। हमें बहुत खुशी है कि आप जर्मनी के अपने घर से इस घर में आये। ये भी आपका घर है। इस देश में आपका स्वागत है। इसे अपना ही घर जान कर आराम करें।
इस देश की पुरातन विचारधारा रही है, "ये विशव एक ही परिवार है।" हम सब एक ही परिवार का अंश हैं। ऐसा परिवार जहां मानवीय गुणों की सत्ता का सर्वोच्च महत्व हो। मानवीय गुणों की आवश्यकता व्यापार, राजनीति और सामाजिक जीवन में भी है। किसी भी क्षेत्र में आप देखें, अगर वहां मानवीय गुण हैं, एक जुड़ाव है, सामंजस्य है तो समाज जीवित रहता है। १० वर्षों में कम्यूनिज़्म ढह गया। १० महीनों से भी कम समय में पूंजीवाद ढह गया। मानवीयता के अभाव में कोई भी वाद चल नहीं सकता। कुछ लोगों के लालच के कारण ही आज पूरी दुनिया एक वित्तीय संकट से जूझ रही है।
ये पुरानी बात है कि सब अलग अलग कक्षों में काम करें। समाज अलग था। राजनीति अलग थी। व्यापार का क्षेत्र अलग था। धर्म और आध्यात्म अलग थे। समाज के सर्वांगीण विकास के लिये समाज के सभी अलग अलग हिस्सों को एक ताल में सामंजस्य स्थापित कर के, एक दूसरे को सहयोग देते हुए काम करना होगा।
नैतिकता ही व्यापार की रीढ़ की हड्डी है। व्यापार से विश्व का पोषण होता है। व्यापार से ही विश्व से भुखमरी जायेगी और समाज में आत्मविश्वास जगेगा।
मुझे खुशी है कि भारतीय और जर्मन व्यापार मंडल यहां आये हैं। मैं चाहता हूं कि आप लोग आपस में बात करें और भारत, जर्मनी और यूरोप के बीच हमारी पुरानी परंपरा पुष्ट करें।
हम सब एक ही परिवार का अंग हैं। स्वस्थ शरीर, सौम्य समाज और प्रसन्न मन हरेक का जन्मसिद्ध अधिकार है। आइये, हम सब साथ मिलकर एक सुखी समाज के लिये काम करें । धन्यवाद।


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