"हमारा विस्तार हमारे शरीर से कई अधिक है"

पिछली पोस्ट के शेष अंश..

जीवन प्रेम है, जीवन उत्साह है, जीवन उर्जा का फव्वारा है।

मध्यम भोजन, मध्यम गतिविधि, और मध्यम कृत्य से आप अपने को सर्वव्यापी चेतना से जुड़ा हुआ पाते हैं। फिर आप अपने को केवल एक इंसान के रूप में नहीं देखते, बल्कि आप अपना विस्तार बहुत बड़ा और फैला हुआ पाते हैं। शरीर केवल एक सूत्र है, मन बहुत बड़ा है। हमारा मन पूरी सृष्टि में फैला हुआ है। मन बहुत बड़ा है, और चेतना का विस्तार बहुत विस्तृत है।

हम टी वी पर बहुत से कार्यकम देखते हैं। टी वी कवल एक डिब्बा है जो तरंग बाहर उत्सर्जित करता है। हमारा शरीर भी ऐसा ही है जो सारी दुनिया से तरंग प्रतिबिंबित करता है। इसी तरह तुम हर जगह व्यापक हो, मैं हर जगह व्यापक हूँ। यह तुम्हे आत्मीय स्तर से जोड़ता है।

तुम इतने व्यापक हो।

तुम ज्ञान से इतने स्थिर हो।

तुम शांतिपूर्ण ज्वलित उर्जा हो।

तुम पत्थर की तरह मज़बूत और फूल की तरह नाज़ुक हो।

तुम्हारी पूर्ण चेतना खिली हुई है।

बहुत से लोग प्रार्थना करते हैं और उन्हे लगता है कि उनकी प्रार्थना सुनी नहीं जा रही है। ऐसा कयों होता है? क्योंकि वो ध्यान नहीं करते। यह बिना सिम कार्ड के मोबाइल फोन जैसा है। तुम बार बार डायल कर सकते हो पर उसका फैदा नहीं होगा। हमे समाज के लिए कोई ना कोई कार्य करना ही चाहिए तांकि बैटरी चार्ज रहे, और एक बेहतर नेटवर्क के लिए ध्यान और साधना। सिम कार्ड के लिए पथ पर होना ज़रुरी है।


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